Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryमुरैना के राष्ट्रीय क्रिकेटर शिवम शर्मा ने 24 साल की उम्र में नेपियर घास की खेती से लाखों रुपये का मुनाफा कमाकर युवाओं के लिए एक नई मिसाल पेश की है। उन्होंने महज पांच बीघा जमीन से शुरुआत कर अपने कृषि व्यवसाय को सौ बीघा तक पहुंचाया है, जिससे एक बार के निवेश में सालों तक कमाई हो रहCategoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/morena-5-100-1b851521
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमुरैना के राष्ट्रीय स्तर के क्रिकेटर शिवम शर्मा (राजौरिया) ने खेल के मैदान से निकलकर कृषि क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। 24 वर्ष की आयु में, उन्होंने न केवल क्रिकेट में राज्य का नाम रोशन किया, बल्कि खेती को एक आधुनिक और लाभकारी व्यवसाय मॉडल के रूप में स्थापित कर आज के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं। कभी बल्ला थामने वाले शिवम अब नेपियर घास की खेती के दम पर सालाना लाखों रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteनेपियर घास की खासियत और मुनाफा Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteशिवम के अनुसार, नेपियर घास की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें एक बार का निवेश कई सालों तक मुनाफा देता है। इसे एक बार लगाने के बाद यह लगातार 10 से 15 वर्षों तक उपज देती रहती है। साल भर में इस घास की 5 से 6 बार कटाई की जा सकती है। यह किसी भी प्रकार की मिट्टी में उग सकती है, बशर्ते वहां सिंचाई की उचित व्यवस्था हो। इसे हर 15 दिन में पानी और प्रत्येक कटाई के बाद खाद की आवश्यकता होती है। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteशिवम बताते हैं कि प्रति बीघा खेत से साल भर में लगभग 600 क्विंटल हरा चारा प्राप्त होता है। वे इस चारे को गौशालाओं और डेयरी संचालकों को 250 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बेचते हैं। सभी खर्चों को निकालने के बाद, उन्हें प्रति बीघा 80,000 से 1 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ हो रहा है। इसी मुनाफे के बल पर उन्होंने अपनी खेती का रकबा 5 बीघा से बढ़ाकर 100 बीघा तक कर लिया है, जिसमें से 90 बीघा जमीन आसपास के गांवों में किराए पर लेकर खेती की जा रही है। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteमेरठ दौरे से मिली प्रेरणा Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस सफल कृषि यात्रा की शुरुआत वर्ष 2021 में हुई, जब शिवम क्रिकेट का सामान खरीदने मेरठ गए थे। वहां उन्होंने अपने एक साथी खिलाड़ी के पिता को डेयरी फार्मिंग और उसके लिए नेपियर घास की खेती करते देखा। यहीं से उनके मन में इस खेती को एक अतिरिक्त व्यवसाय के रूप में अपनाने का विचार आया। हालांकि, शुरुआत आसान नहीं थी। शिवम ने पहली बार 60,000 रुपये खर्च करके ब्राजील से नेपियर की कलमें मंगवाईं, लेकिन डिलीवरी में देरी के कारण वे खराब हो गईं। इस बड़े नुकसान के बावजूद, शिवम ने हार नहीं मानी। उन्होंने दोबारा मेरठ से कलमें मंगवाईं और मात्र 5 बीघा जमीन से अपने इस नए सफर की शुरुआत की। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteनेपियर घास की खेती का तरीका Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteयुवा किसान शिवम के अनुसार, नेपियर घास की खेती एक बीघा में लगभग 20 हजार रुपये की शुरुआती लागत से शुरू की जा सकती है। इसमें 5,000 गांठें (कलमें) लगती हैं, जिनकी कीमत लगभग 10 हजार रुपये होती है। खेत तैयार करने के बाद, 2×2 फीट की दूरी पर इनकी रोपाई की जाती है। रोपाई में चार मजदूरों की मजदूरी करीब 2 हजार रुपये और अन्य खर्च मिलाकर कुल लागत लगभग 20 हजार रुपये आती है। एक बार लगाने के बाद यह फसल 10 से 15 साल तक लगातार उत्पादन देती है, जिससे किसानों को दीर्घकालिक लाभ मिलता है। Add text below Add image below