Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryमध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एससी-एसटी वर्ग के गरीब पट्टेदारों की जमीनों पर अवैध कब्जे के मामलों में पुलिस और प्रशासन के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने गुना एसपी और ओआईसी को आड़े हाथों लेते हुए व्यक्तिगत हलफनामा पेश करने के निर्देश दिए हैं।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-story-73ba3279
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअंचल में कमजोर वर्ग के लोगों को उनकी जमीनों से बेदखल करने और रसूखदारों द्वारा अवैध कब्जे किए जाने के मामलों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteप्रशासन पर रसूखदारों के समर्थन का आरोप Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसुनवाई के दौरान अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी तंत्र बाहुबल और राजनीतिक रसूख रखने वाले लोगों का परोक्ष रूप से समर्थन कर रहा है। गरीबों को उनकी पट्टे की जमीन पर सुरक्षा दिलाने में प्रशासन पूरी तरह विफल साबित हुआ है, जिससे पीड़ितों में निराशा बढ़ रही है। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteयह पूरा मामला अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम तथा मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 170-बी के तहत दलितों की जमीन हड़पे जाने और उन्हें न्याय दिलाने से जुड़ा हुआ है। कोर्ट ने पाया कि जमीनों की धोखाधड़ी के मामलों में पुलिस प्रभावी कार्रवाई करने से बचती रही है। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteकार्रवाई के आंकड़ों में बड़ी गड़बड़ी Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअदालत के समक्ष यह तथ्य आया कि 133 मामलों में जमीन वापसी के दावे सामने आने के बावजूद पुलिस ने महज 14 एफआईआर दर्ज कीं। हैरानी की बात यह है कि एक ही एफआईआर में 96-96 आरोपियों के मामलों को सामूहिक रूप से जोड़ दिया गया, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसुनवाई के दौरान गुना की पुलिस अधीक्षक हितिका वसल से आवेदन के कुछ खास पैराग्राफ में दर्ज बयानों की सत्यता को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन कई बार पूछने पर भी उनकी ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteपुलिस और ओआईसी के बीच आपसी खींचतान Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमामले में नया मोड़ तब आया जब एसपी ने यह दलील दी कि संबंधित आवेदन पुलिस विभाग को भरोसे में लिए बिना ओआईसी यानी प्रभारी सहायक श्रम आयुक्त आशीष कुमार तिवारी के कहने पर लगाया गया था। वहीं सरकारी वकील ने भी माना कि उन्होंने ओआईसी को ऐसा करने से मना किया था। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअदालत ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए सहायक श्रम आयुक्त एवं ओआईसी आशीष कुमार तिवारी को तलब किया है और उनसे इस पूरे घटनाक्रम पर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने को कहा है। कोर्ट यह स्पष्ट करना चाहता है कि आखिर किसके निर्देश पर और किन उद्देश्यों के तहत ऐसे बयान दर्ज कराए गए। Add text below Add image below