Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryग्वालियर की जर्जर सड़कों की जांच से ठीक पहले नगर निगम द्वारा सड़क की परत उखाड़ने और नई परत बिछाने के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने निगमायुक्त को तलब करते हुए सैंपलिंग प्रक्रिया को लेकर कई सख्त निर्देश दिए हैं।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-story-623ca953
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर शहर की खराब सड़कों के मामले को लेकर दायर की गई जनहित याचिका पर सोमवार को उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने नगर निगम के अधिकारियों की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया है। मामला तब गरमाया जब यह बात सामने आई कि जिस मार्ग से जांच आयोग को नमूने लेने थे, नगर निगम ने ठीक उसी जगह पर रातों-रात कार्रवाई करते हुए सड़क की पुरानी परत को खुदवाकर नया निर्माण कार्य शुरू कर दिया। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteनिगमायुक्त को चैंबर में किया तलब और दिए कड़े निर्देश Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteघटना की जानकारी मिलते ही हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय को अपने चैंबर में तलब कर लिया। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की बेंच ने निगमायुक्त द्वारा पेश किए गए वीडियो और साक्ष्यों का बारीकी से अवलोकन किया। अदालत ने स्पष्ट चेतावनी दी कि कमिश्नर अपने मोबाइल से किसी भी तरह का वीडियो, फोटो या व्हाट्सएप चैट डिलीट नहीं करेंगे, अन्यथा उनका फोन जब्त किया जा सकता है। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteव्हाट्सएप पर सरकारी कामकाज और सैंपलिंग में बदलाव Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर ने तस्वीरें और वीडियो अदालत के समक्ष रखकर खुलासा किया कि 19 अगस्त को बेटी बचाओ चौराहा से गुड़ा गुड़ी का नाका स्थित सड़क नंबर 7 की जांच तय थी। इससे बचने के लिए निगम ने निर्माण शुरू कर दिया था। निगमायुक्त ने सफाई दी कि सोशल मीडिया पर वीडियो देखने के बाद उन्होंने कार्यपालन यंत्री को व्हाट्सएप पर निर्देश दिए थे। इस पर अदालत ने तीखा सवाल उठाया कि क्या सरकारी काम व्हाट्सएप के माध्यम से संचालित करने की अनुमति है? Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअदालत ने यह भी सवाल किया कि जब सड़क पिछले एक साल से जर्जर हालत में पड़ी थी, तो ठीक सैंपलिंग की तारीख तय होते ही बिना अनुमति के मरम्मत का नाटक क्यों रचा गया। चूंकि निगम द्वारा एक फीट तक सड़क खोद दिए जाने की बात स्वीकार की गई, इसलिए अदालत ने आदेश दिया कि अब सैंपलिंग ऊपरी एक फीट की परत को हटाकर उसके नीचे से की जाएगी। साथ ही जांच की तिथि 20 अगस्त से बदलकर 19 अगस्त ही कर दी गई। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteमोबाइल में पहले से मिला बदहाल सड़क का वीडियो Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअदालत में सुनवाई के दौरान एक दिलचस्प और चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया कि निगमायुक्त को क्षेत्र की बदहाली की पूरी जानकारी पहले से थी। उनके मोबाइल फोन में एक वीडियो मिला जिसका शीर्षक 'जनता त्रस्त अधिकारी मस्त, बीते एक साल से बेटी बचाओ चौराहे के पास की सड़क की स्थिति बदहाल' था। यह वीडियो खुद निगमायुक्त द्वारा निगम के वकील को भेजा गया था। कोर्ट ने इसे रिकॉर्ड पर लिया कि जब अधिकारी वास्तविकता से पहले से वाकिफ थे, तो सैंपलिंग से ठीक पहले सड़क सुधारने का यह खेल क्यों खेला गया। Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपारदर्शिता और गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की खातिर अदालत ने सख्त कदम उठाते हुए आदेश दिया है कि निर्धारित स्थलों से कुल 84 नमूने लिए जाएंगे। प्रत्येक स्थान के चार सैंपल ग्वालियर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय की मुहर लगे मोम से सील किए जाएंगे, जिन्हें परीक्षण के लिए लोक निर्माण विभाग तथा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा की प्रयोगशालाओं में भेजा जाएगा। Add text below Add image below