Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryग्वालियर के पारंपरिक बुनकरों द्वारा तैयार की जाने वाली मलमल खादी की मांग खाड़ी देशों में तेजी से बढ़ रही है। दुबई और कुवैत में इस मुलायम कपड़े का उपयोग नवजात शिशुओं के लिए रैप और वस्त्र बनाने में किया जा रहा है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-story-44ae2645
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर के हुनरमंद पारंपरिक बुनकरों के हाथों बुनी जाने वाली बेहद महीन मलमल खादी अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी खास पहचान बना रही है। इस विशेष मस्लिन कॉटन की ख्याति अब खाड़ी देशों तक फैल चुकी है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteदुबई और कुवैत में बढ़ रही है बच्चों के कपड़ों की मांग Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसंयुक्त अरब अमीरात के प्रमुख शहर दुबई और कुवैत में इस मलमल खादी से नवजात शिशुओं के लिए आरामदायक वस्त्र और विशेष रैप तैयार किए जा रहे हैं। स्थानीय मौसम और तापमान के पूरी तरह अनुकूल होने के कारण इस कपड़े को बच्चों के लिए बहुत उपयुक्त माना गया है। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteवर्तमान में यह पारंपरिक उत्पाद थर्ड पार्टी एक्सपोर्टर के माध्यम से विदेशों में भेजा जा रहा है, जिससे इस कारोबार का दायरा बढ़कर करीब 2 से 3 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quote150 से 400 थ्रेड काउंट तक तैयार होती है मलमल Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमध्य भारत खादी संघ के आंकड़ों के अनुसार, इस मस्लिन कॉटन को 150 से 400 थ्रेड काउंट की विभिन्न श्रेणियों में गढ़ा जा रहा है। बेहद बारीक धागों की बुनाई से बना यह वस्त्र सामान्य सूती कपड़ों की तुलना में अत्यंत हल्का और कोमल होता है। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइसकी कीमत गुणवत्ता और थ्रेड काउंट के आधार पर लगभग 400 से 750 रुपए प्रति मीटर है, जबकि उच्च श्रेणी की प्रीमियम क्वालिटी 2400 रुपए प्रति मीटर तक बेची जाती है। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteउत्पादन में लगता है लंबा समय और कड़ी मेहनत Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमध्य भारत खादी संघ के सुपरवाइजर ढोंगर सिंह ने बताया कि मलमल कॉटन का निर्माण सामान्य कपड़ों के मुकाबले अधिक श्रमसाध्य है। इसके महीन धागों की सफाई, धुलाई और कताई के बाद ही बुनाई का काम शुरू होता है और केवल ताना तैयार करने में ही लगभग 8 दिन का समय लग जाता है। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteशुरुआती चरण में एक मीटर कपड़ा बनाने में करीब 2 घंटे तक का समय लग जाता है। हाथ से संचालित इन लूम्स पर काम करने वाले ग्वालियर के आसपास के ग्रामीण इलाकों के बुनकर पूरी लगन से इस पारंपरिक कला को जीवित रखे हुए हैं। Add text below Add image below