Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryग्वालियर के मुरार थाना क्षेत्र में साइबर ठगों ने एक सेवानिवृत्त कार्यपालन यंत्री को आईएएस अधिकारी के नाम पर झांसा देकर ठग लिया। आरोपियों ने सीआरपीएफ कमांडेंट का पुराना फर्नीचर बेचने के नाम पर अलग-अलग किस्तों में 1,56,500 रुपये ट्रांसफर करवा लिए।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-story-3b1b7dfc
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर शहर में साइबर अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका ताजा उदाहरण मुरार थाना क्षेत्र में सामने आया है। यहां शातिर ठगों ने प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पी. नरहरि के नाम का इस्तेमाल करते हुए एक फर्जी फेसबुक प्रोफाइल तैयार की। इस फर्जी आईडी के जरिए सिंचाई विभाग के 71 वर्षीय सेवानिवृत्त कार्यपालन यंत्री (EE) को शिकार बनाया गया और उनसे एक लाख छप्पन हजार पांच सौ रुपये की ठगी कर ली गई। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteफेसबुक फ्रेंड रिक्वेस्ट से शुरू हुआ धोखाधड़ी का सिलसिला Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमुरार के कल्पना नगर में रहने वाले 71 वर्षीय मैथिली शरण गुप्ता सिंचाई विभाग से बतौर ईई सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके अनुसार, गत 18 सितंबर को उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर आईएएस अधिकारी पी. नरहरि के नाम से एक फ्रेंड रिक्वेस्ट आई थी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया था। इसके बाद चैट के दौरान कथित अधिकारी ने उनका मोबाइल नंबर हासिल कर लिया और बातचीत आगे बढ़ाई। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteबातचीत के दौरान ठग ने खुद को आईएएस अधिकारी बताते हुए सुमित कुमार नामक एक अन्य व्यक्ति का नंबर साझा किया और उसे अपना सीआरपीएफ कमांडेंट दोस्त बताया। ठग ने कहा कि उसका दोस्त ट्रांसफर होने के कारण अपने घर का पुराना फर्नीचर बेहद कम कीमत पर बेचना चाहता है, और पीड़ित को उस फर्नीचर की तस्वीरें भी भेजी गईं। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसस्ता फर्नीचर खरीदने के चक्कर में गवांए रुपये Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteफर्नीचर पसंद आने के बाद मैथिली शरण गुप्ता की बात तथाकथित कमांडेंट से हुई और 95 हजार रुपये में सौदा तय हो गया। पीड़ित ने विश्वास करके 21 सितंबर को बताए गए बैंक खाते में 95 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। इसके तुरंत बाद ठगों ने सामान भेजने में टेक्निकल समस्या आने का बहाना बनाया और अतिरिक्त 61 हजार 500 रुपये और ऐंठ लिए। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteजब शातिर यहीं नहीं रुके और उन्होंने तीसरी बार में 88 हजार रुपये की और मांग की, तब जाकर बुजुर्ग इंजीनियर को किसी गड़बੜ का अहसास हुआ। शक होने पर उन्होंने तत्काल आईएएस अधिकारी पी. नरहरि से फोन पर संपर्क साधा और पूरी बात बताई। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteआईएएस से संपर्क करने पर हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअसली आईएएस अधिकारी से बात करने के बाद स्पष्ट हुआ कि उन्होंने ऐसी कोई फ्रेंड रिक्वेस्ट नहीं भेजी थी और उनके नाम का दुरुपयोग कर फर्जी फेसबुक आईडी बनाई गई है। सच्चाई सामने आते ही ठगों ने व्हाट्सएप चैट से सभी तस्वीरें और संदेश डिलीट कर दिए और संपर्क तोड़ दिया। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteघटना के बाद पीड़ित ने मुरार थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। बताया जा रहा है कि इस मामले में वरिष्ठ स्तर पर हस्तक्षेप के बाद पुलिस हरकत में आई। फिलहाल मुरार थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है और इस्तेमाल किए गए बैंक खातों व मोबाइल नंबरों के जरिए तकनीकी पड़ताल शुरू कर दी है। Add text below Add image below