Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryकेंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर जिला न्यायालय में एक समझौता आवेदन पेश किया है। इस आवेदन के बाद सिंधिया राजघराने की दशकों पुरानी संपत्ति विवाद के निपटारे की उम्मीद जगी है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-story-270bb9d5
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर के प्रतिष्ठित सिंधिया राजघराने में दशकों से चला आ रहा संपत्ति विवाद अब एक बड़े समझौते की ओर बढ़ रहा है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से ग्वालियर जिला न्यायालय में एक आवेदन दायर किया गया है, जिससे इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteहालांकि, रिकॉर्ड रूम से फाइलें उपलब्ध न होने के कारण बुधवार को इस आवेदन पर सुनवाई नहीं हो सकी और इसे टाल दिया गया। इस समझौते के तहत, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं, जिनमें राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और मध्य प्रदेश की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया शामिल हैं, के बीच अरबों रुपये की शाही संपत्तियों के बंटवारे पर सहमति बन चुकी है। Add text below Add image below03Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसमझौते का आधार और कानूनी प्रक्रिया Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपारिवारिक बैठकों के कई दौर के बाद, समझौते का अंतिम मसौदा तैयार कर लिया गया है और अब केवल कानूनी मंजूरी बाकी है। इस ऐतिहासिक समझौते के लागू होने से दिल्ली, मुंबई, पुणे और ग्वालियर की अदालतों में वर्षों से लंबित एक दर्जन से अधिक मुकदमे समाप्त हो जाएंगे। Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसूत्रों के अनुसार, समझौते का मूल मंत्र 'जो जहां काबिज, वो संपत्ति उसी की' रखा गया है, जिसका उद्देश्य आपसी कड़वाहट को दूर करना है। यह एक व्यावहारिक दृष्टिकोण है जो विवादों को सुलझाने में मदद करेगा। Add text below Add image below06Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसंपत्तियों का स्वरूप और ट्रस्ट Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसिंधिया राजपरिवार की अधिकांश संपत्तियां सीधे व्यक्तियों के नाम पर न होकर, 1970 के दशक से 'सर जयाजीराव ट्रस्ट' और 'कृष्ण माधव ट्रस्ट' जैसी संस्थाओं के अधीन हैं। दिल्ली में 'सिंधिया पॉटरीज' की जमीन पर बनी तीन आलीशान कोठियों में वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और ऊषा राजे राणा निवास करती हैं। Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपूर्व में हुए पारिवारिक बंटवारे के तहत, माधवराव सिंधिया को 'सिंधिया इंवेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड (SIPL)' की कमान मिली थी, जिसका प्रबंधन अब ज्योतिरादित्य सिंधिया कर रहे हैं। Add text below Add image below09Heading Paragraph Heading Subheading Quoteराजमाता की प्रिय धरोहर का हस्तांतरण Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसंपत्ति बंटवारे का एक भावनात्मक पहलू राजमाता विजयाराजे सिंधिया का पन्ने (रत्न) का 'दिव्य शिवलिंग' है। राजमाता इस शिवलिंग की प्रतिदिन विशेष आराधना करती थीं और इसे अपने पास रखती थीं। वर्तमान में यह शिवलिंग वसुंधरा राजे सिंधिया के पास है। Add text below Add image below11Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteविश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि नए समझौते के तहत, यह ऐतिहासिक और राजमाता की सबसे प्रिय धरोहर अब उनके पोते, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को मिलने जा रही है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। Add text below Add image below