Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryछतरपुर जिले के धरकुआ निवासी 14 वर्षीय शिवम के सिर और पैर में त्रिशूल आर-पार धंस गया था। ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में पांच घंटे चले जटिल ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने उसकी जान बचा ली और उसे नई जिंदगी दी।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-14-81c5b727
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल (JAH) के न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने एक अद्भुत और जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। छतरपुर जिले के 14 वर्षीय शिवम के सिर और पैर में एक त्रिशूल आर-पार धंस गया था, जिसे पांच घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस ऑपरेशन के बाद बच्चे को पूरी तरह स्वस्थ होने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जिससे डॉक्टरों की टीम ने एक बार फिर अपनी विशेषज्ञता का लोहा मनवाया है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteजानलेवा हादसा और अस्पताल तक का सफर Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteयह घटना 25 जून को छतरपुर जिले के धरकुआ गांव में हुई थी। राकेश का बेटा शिवम अपने घर की छत पर खेल रहा था, तभी अचानक वह नीचे माता की मढ़िया पर जा गिरा। इस दर्दनाक हादसे में मढ़िया पर लगा त्रिशूल का एक नुकीला हिस्सा उसकी बाईं आंख के पास से सिर में घुसकर दिमाग को चीरता हुआ खोपड़ी के दूसरी तरफ तक पहुंच गया। वहीं, त्रिशूल का दूसरा फाल उसके बाएं पैर के आर-पार हो गया। परिजनों ने तुरंत ग्राइंडर की मदद से त्रिशूल के बाहर निकले हिस्से को काटा, ताकि शिवम को तत्काल ग्वालियर के जेएएच ट्रॉमा सेंटर लाया जा सके। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteडॉक्टरों के लिए बड़ी चुनौती Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteजेएएच में भर्ती होने के बाद शिवम की गंभीर हालत को देखते हुए न्यूरोसर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अविनाश शर्मा ने डॉ. आनंद शर्मा और अन्य डॉक्टरों के साथ मिलकर केस पर गहन चर्चा की। डॉक्टरों के अनुसार, यह मामला अत्यंत संवेदनशील था, जिसमें जरा सी भी चूक बच्चे की आंखों की रोशनी, बोलने या सुनने की क्षमता छीन सकती थी, या उसकी जान भी जा सकती थी। त्रिशूल दिमाग के बेहद नाजुक हिस्से से गुजरा था, जिससे ऑपरेशन को लेकर अत्यधिक सावधानी बरतनी थी। Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteन्यूरोसर्जरी विभाग की टीम ने पांच घंटे तक चली एक अत्यंत जटिल सर्जरी को अंजाम दिया। इस दौरान डॉक्टरों ने बेहद कुशलता से त्रिशूल को बच्चे के सिर और पैर से सुरक्षित बाहर निकाला। राहत की बात यह रही कि ऑपरेशन के दौरान रक्तस्राव बहुत कम हुआ और बच्चे को खून चढ़ाने की आवश्यकता नहीं पड़ी, जो इस सर्जरी की सफलता का एक और महत्वपूर्ण पहलू था। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को सफल बनाने वाली जेएएच की टीम में न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ. अविनाश शर्मा और डॉ. आनंद शर्मा के साथ रेजीडेंट चिकित्सक डॉ. पृथ्वीराज और डॉ. सौम्या प्रधान शामिल थे। इसके अलावा, सर्जरी विभाग से डॉ. एमएम मुदगल और डॉ. अनिल शर्मा तथा एनेस्थीसिया की पूरी टीम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteनई जिंदगी पाकर घर लौटा शिवम Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteऑपरेशन के बाद शिवम की हालत में तेजी से सुधार हुआ। डॉक्टरों की लगातार निगरानी और देखभाल के चलते वह पूरी तरह से स्वस्थ हो गया। मंगलवार को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जिसके बाद वह अपने परिवार के साथ नई जिंदगी पाकर घर लौट सका। यह घटना ग्वालियर के चिकित्सा क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित हुई है, जहां डॉक्टरों ने अपनी विशेषज्ञता और समर्पण से एक बच्चे को मौत के मुंह से बाहर निकाला। Add text below Add image below