Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ने प्रदेश में एआई और रोबोटिक्स आधारित खेती को बढ़ावा देने के लिए शासन को 139 करोड़ रुपए का प्रस्ताव सौंपा है। इस योजना के तहत मालवा और चंबल के 26 जिलों में स्मार्ट वेदर स्टेशन लगाए जाएंगे, जिससे किसानों को मोबाइल पर ही मौसमCategoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-139-68ee12c8
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमध्य प्रदेश के कृषि क्षेत्र को पूरी तरह से आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय (RVSKVV) ने एक अहम पहल की है। विश्वविद्यालय ने डिजिटल और रोबोटिक फार्मिंग प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाने के लिए राज्य शासन को 139 करोड़ रुपए का विस्तृत प्रस्ताव भेजा है। इस प्रोजेक्ट के स्वीकृत होने के बाद प्रदेश की किसानी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ड्रोन, रोबोटिक्स और सेंसर आधारित तकनीक का दायरा काफी बढ़ जाएगा। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteकैंपस में बनेगी विशेष एआई एग्रीकल्चर लैब Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteशासन से हरी झंडी मिलने के बाद विश्वविद्यालय परिसर के भीतर एक अत्याधुनिक एआई एग्रीकल्चर लैब की स्थापना की जाएगी। इस लैब के जरिए कृषि छात्रों, शोधार्थियों के अलावा सीधे तौर पर किसानों को भी आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा खेतों में ड्रोन तकनीक, कृषि रोबोट और ऑटोमेटेड सिंचाई प्रणालियों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे समय और पानी की बचत हो सके। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteप्रिसिजन फार्मिंग की अवधारणा के तहत अत्याधुनिक सेंसरों की मदद से मिट्टी की नमी, उसमें मौजूद पोषक तत्वों और फसल की सेहत का सटीक डेटा जुटाया जाएगा। इस डेटा के विश्लेषण से किसानों को खाद, पानी और बीज के इस्तेमाल से जुड़े फैसले बहुत ही सटीकता के साथ लेने में मदद मिलेगी। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading QuoteIIT रोपड़ के साथ हुआ एमओयू, 26 जिलों में लगेंगे वेदर स्टेशन Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteविश्वविद्यालय के शिक्षण निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार ने जानकारी दी है कि RVSKVV ने आईआईटी रोपड़ के एएनएएम (ANAM) एआई सेंटर के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। शिक्षा मंत्रालय से वित्तपोषित इस केंद्र के सहयोग से खेती-किसानी की स्थानीय जरूरतों के मुताबिक विशेष एआई टूल्स तैयार और कस्टमाइज किए जा रहे हैं। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस महत्वकांक्षी योजना के अंतर्गत मुख्य रूप से मालवा और चंबल संभाग के कुल 26 जिलों में एआई व सेंसर आधारित स्मार्ट वेदर स्टेशन स्थापित किए जाने की योजना है। विश्वविद्यालय प्रशासन का लक्ष्य है कि इन वेदर स्टेशनों की स्थापना आगामी तीन महीनों के भीतर पूरी कर ली जाए। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteमोबाइल ऐप के जरिए 25 किलोमीटर के दायरे की मिलेगी जानकारी Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteप्रस्तावित ये स्मार्ट वेदर स्टेशन लगभग 7 से 8 फीट ऊंचे होंगे, जिनमें लगे सेंसर करीब 25 किलोमीटर के दायरे में मौसम और मिट्टी से जुड़ा पल-पल का डेटा रिकॉर्ड करेंगे। इस एकत्रित डेटा को एयरटेल और बीएसएनएल के नेटवर्क के माध्यम से सर्वर तक भेजा जाएगा, जिसे किसान मोबाइल ऐप और एएनएएम एआई पोर्टल पर अपनी लॉगिन आईडी के जरिए आसानी से देख सकेंगे। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस पूरी डिजिटल प्रक्रिया में किसानों को भी सक्रिय रूप से शामिल किया जाएगा। जिस भी किसान के खेत में यह वेदर स्टेशन लगाया जाएगा, उसे एक विशिष्ट लॉगिन आईडी प्रदान की जाएगी। इसके जरिए किसान अपने खेत की वास्तविक तस्वीरें और जमीनी स्थिति सीधे एप पर अपलोड कर सकेंगे। Add text below Add image below