Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryगुना जिले के बमोरी क्षेत्र के सुंडा गांव में आज भी लोग बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीने को मजबूर हैं। तेजा दशमी के अवसर पर जुलूस निकालने से पहले ग्रामीणों को खुद मोटर चलाकर रास्ते का कीचड़ साफ करना पड़ा।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/guna-story-9b76cbfe
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसड़क पर कीचड़ के बीच जुलूस निकालने की मजबूरी Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteगुना जिले के बमोरी इलाके की पाटी पंचायत के अंतर्गत आने वाले सुंडा गांव में बुनियादी विकास के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। यहां के रहवासी आज भी पक्की सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए परेशान हैं। हालात इतने बदतर हैं कि तेजा दशमी के पावन पर्व पर जुलूस निकालने से पहले ग्रामीणों को भारी मशक्कत करनी पड़ी। रास्ते में फैले कीचड़ को साफ करने के लिए लोगों ने मोटर से पानी डालकर सड़क को धोया, जिसके बाद जाकर आवागमन लायक रास्ता बन पाया और जुलूस निकाला जा सका। Add text below Add image below03Heading Paragraph Heading Subheading Quoteराजस्थान सीमा के पास बसा है यह उपेक्षित गांव Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteबमोरी क्षेत्र के अंतिम छोर पर स्थित यह गांव राजस्थान सीमा के बिल्कुल करीब है। गांव के स्थानीय निवासी बाबूलाल, जगदीश, रामहेत, पृथ्वीराज और विनोद ने बताया कि सुंडा गांव को बसे हुए सैकड़ों वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों और शासन-प्रशासन की बेरुखी जस की तस बनी हुई है। न तो किसी सरपंच ने और न ही क्षेत्र के किसी विधायक या मंत्री ने इस गांव की सुध ली है। Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्रामीणों का दर्द है कि सदियों पुरानी बस्तियों की तरह आज भी यहां एक भी पक्की सड़क या पक्का मकान नजर नहीं आता है। पूरे गांव के लोगों को हर दिन कीचड़ भरे रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है और वे कच्ची झुग्गियों में जीवन गुजारने को मजबूर हैं। तेजा दशमी के मौके पर सड़क साफ करते हुए ग्रामीणों के वीडियो भी सामने आए हैं, जो क्षेत्र के विकास दावों की पोल खोलते हैं। Add text below Add image below06Heading Paragraph Heading Subheading Quoteचुनाव बहिष्कार के बावजूद नहीं सुनी गई फरियाद Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteगांव वालों का कहना है कि वे अपनी इस बदहाली को लेकर सरपंच से लेकर सूबे के मुखिया यानी मुख्यमंत्री तक गुहार लगा चुके हैं। प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव और आश्वासन के बल पर मतदान तो करवा लिया जाता है, लेकिन जब सड़क और पुलिया जैसी समस्याओं की बात उठाई जाती है, तो कभी गर्मी तो कभी बरसात का बहाना बनाकर टरका दिया जाता है। अपनी अनदेखी से नाराज ग्रामीण अब तक तीन बार चुनावों का बहिष्कार भी कर चुके हैं। Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteहर स्तर पर केवल कोरे आश्वासन मिलने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जब वे पंचायत में जाते हैं तो उन्हें विधायक के पास भेजा जाता है, और जब वे विधायक के पास पहुंचते हैं तो वहां से भी सिर्फ जल्द काम कराने का आश्वासन थमा दिया जाता है। सुंडा गांव के रहवासियों ने अब शासन से पुरजोर मांग की है कि उनकी सुध ली जाए और गांव में सड़क व बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं जल्द से जल्द बहाल की जाएं। Add text below Add image below