Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryमध्य प्रदेश के गुना जिले में ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत सामने आए 3.74 करोड़ रुपये के वित्तीय फर्जीवाड़े में कार्रवाई तेज हो गई है। राज्य आजीविका मिशन के सीईओ ने जिला परियोजना प्रबंधक को भोपाल अटैच करते हुए प्रशासनिक सख्ती बढ़ा दी है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/guna-374-dc83a5e7
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteगुना जिले में मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत हुए लगभग 3.74 करोड़ रुपये के बड़े वित्तीय घोटाले के मामले में प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में राज्य आजीविका मिशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने जिला परियोजना प्रबंधक (डीपीएम) सोनू सुशीला यादव को भोपाल कार्यालय से संबद्ध कर दिया है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteपोर्टल और बैंक खातों के मिलान में सामने आई थी गड़बड़ी Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteयोजना के तहत गठित स्व-सहायता समूहों और उनके सामुदायिक संगठनों के वित्तीय लेन-देन का ब्योरा केंद्र सरकार के 'लोकोस' पोर्टल पर दर्ज किया जाता है। बीते मई महीने में वित्तीय प्रबंधन प्रणाली और लोकोस पोर्टल के आंकड़ों की जब पड़ताल की गई, तो गुना विकासखंड के प्रतिज्ञा सीएलएफ से जुड़े 90.25 लाख रुपये के आंकड़ों में भारी अंतर पाया गया। पोर्टल पर यह राशि दिख रही थी, लेकिन बैंक के असली दस्तावेजों और स्टेटमेंट में उतनी रकम का कोई हिसाब नहीं मिला। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस बड़ी वित्तीय विसंगति के खुलासे के बाद विभाग में खलबली मच गई। जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने तुरंत तीन सदस्यों की एक जांच समिति गठित कर पूरे मामले की तहकीकात के निर्देश दिए। इसके साथ ही राज्य स्तर पर भी रिपोर्ट भेजी गई, जिसके बाद से लगातार दस्तावेजों और बैंक खातों की गहन छानबीन की जा रही है। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteवर्ष 2021-22 से शुरू हुआ फर्जीवाड़ा, जांच में आंकड़ा पहुंचा 3.74 करोड़ Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteप्रारंभिक जांच के अनुसार इस वित्तीय अनियमितता की जड़ें वित्तीय वर्ष 2021-22 तक जाती हैं। उस समय विष्णु पंवार डीपीएम, मनोज जैन लेखापाल और अमित अग्रवाल सहायक वित्त प्रबंधक के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। जब वर्ष 2019 से 2025 तक के तमाम वित्तीय अभिलेखों को खंगाला गया, तो गड़बड़ी की कुल रकम बढ़कर 3.74 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteजांच में यह भी चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि जरूरतमंद समूहों और पात्र हितग्राहियों तक सरकारी मदद पहुंचाने के बजाय राशि सीधे निजी लोगों और संस्थाओं के बैंक खातों में डायवर्ट कर दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व डीपीएम विष्णु पंवार के फरवरी 2019 में राजगढ़ स्थानांतरित होने के बावजूद बाद के लेन-देन में उनके हस्ताक्षर इस्तेमाल होने की बात भी सामने आई है। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteराज्य समिति की सिफारिश पर कैंट थाने में दर्ज हुई एफआईआर Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteराज्य स्तर से बनाई गई जांच समिति ने इस प्रकरण को सामान्य विभागीय चूक मानने से इनकार कर दिया। समिति ने इसे सीधे तौर पर सरकारी धन के गबन, गंभीर वित्तीय फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी का मामला माना। कलेक्टर के माध्यम से इस मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने की अनुशंसा की गई थी। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसमिति ने पंजाब नेशनल बैंक के संबंधित खाते में ट्रांसफर हुई राशि का भी एक-एक ब्योरा जुटाने के निर्देश दिए थे ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पैसा कहां से आया और किसकी अनुमति से निकाला गया। इसी क्रम में 25 जून को आजीविका मिशन के अधिकारियों की शिकायत पर कैंट पुलिस थाने में अमित अग्रवाल, मनोज जैन और विष्णु पंवार के खिलाफ आधिकारिक रूप से एफआईआर दर्ज कर ली गई। Add text below Add image below