Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryदतिया जिले के उदगंवा क्षेत्र में उल्टी-दस्त से पीड़ित एक साल की बच्ची की मौत का मामला सामने आया है। परिजन उसे बिना डॉक्टर की अनुमति के अस्पताल से घर ले आए थे, जिसके बाद उसकी तबीयत फिर बिगड़ गई।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/datia-story-eebaf893
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteदतिया जिले के उदगंवा इलाके के सलैया पमार आदिवासी डेरे में एक साल की मासूम बच्ची की उल्टी-दस्त के चलते जान चली गई। मृतका की पहचान नीलू आदिवासी के रूप में हुई है, जिसे गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteअस्पताल से बिना डिस्चार्ज कराए ले आए थे घर Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteबच्ची के पिता धर्मेंद्र आदिवासी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि उनकी बेटी को अचानक उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी, जिसके बाद वे उसे उसी शाम जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। डॉक्टरों ने स्थिति को गंभीर देखते हुए उसे पीआईसीयू वार्ड में दाखिल किया था। कुछ दिनों तक चले उपचार के बाद उसकी सेहत में सुधार भी दिखाई देने लगा था। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteधर्मेंद्र के अनुसार, इलाज के बीच में ही वे अस्पताल गए और बिना डॉक्टर की औपचारिक छुट्टी यानी डिस्चार्ज कराए अपनी बेटी को अपने साथ घर ले आए। घर लौटने पर उसी शाम को नीलू की तबीयत एक बार फिर से अचानक बिगड़ गई, लेकिन परिजन उसे दोबारा अस्पताल नहीं पहुंचा सके और कुछ देर बाद उसने दम तोड़ दिया। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteगांव में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर उठे सवाल Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteयह घटना ऐसे वक्त में सामने आई है जब पूरे जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा दस्तक अभियान संचालित किया जा रहा है। स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप है कि इस दुर्घटना के बाद भी स्वास्थ्य विभाग का कोई भी मैदानी अमला या टीम सुदूर गांव तक नहीं पहुंची। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्रामीणों ने क्षेत्र की चिकित्सा व्यवस्था पर गहरा असंतोष जाहिर करते हुए बताया कि उनके गांव स्थित उपस्वास्थ्य केंद्र पर अमूमन ताला लटका रहता है। यहाँ तैनात रहने वाली सीएचओ अक्सर ग्वालियर से अप डाउन करती हैं और कई बार समय से पहले ही वापस लौट जाती हैं, जिससे ग्रामीणों को त्वरित चिकित्सा लाभ नहीं मिल पाता है। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteइलाज के लिए दतिया दौड़ने को मजबूर हैं ग्रामीण Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteस्थानीय निवासियों का कहना है कि उपस्वास्थ्य केंद्र के नियमित तौर पर न खुलने के कारण उन्हें हर छोटी-मोटी बीमारी या आपात स्थिति में इलाज के वास्ते दतिया जिला मुख्यालय की ओर रुख करना पड़ता है। इस मासूम बच्ची की असामयिक मृत्यु ने ग्रामीण अंचल की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलकर रख दी है। Add text below Add image below