Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryदिल्ली हाईकोर्ट ने दतिया विधानसभा उपचुनाव से पहले कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की याचिका खारिज कर दी है। इस फैसले से बैंक एफडी घोटाला मामले में उनकी तीन साल की सजा बरकरार रहेगी, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य और उपचुनाव में भागीदारी पर असर पड़ेगा।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/datia-story-19ebfffa
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteदिल्ली हाईकोर्ट ने दतिया विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले, बैंक एफडी घोटाला प्रकरण में कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की एक महत्वपूर्ण याचिका को खारिज कर दिया है। इस निर्णय के परिणामस्वरूप, उन्हें मिली तीन साल की सजा पर रोक नहीं लग पाएगी, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य और आगामी दतिया उपचुनाव के समीकरणों पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। भारती ने अपनी सजा पर रोक लगाने की अपील की थी, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteक्या था मामला और कोर्ट का फैसला? Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteराजेंद्र भारती ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी सजा और दतिया विधानसभा उपचुनाव की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की थी। उन्होंने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि यदि उनकी दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई जाती है, तो चुनाव लड़ने का उनका संवैधानिक अधिकार प्रभावित होगा। गौरतलब है कि दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट ने 2 अप्रैल को राजेंद्र भारती को बैंक एफडी घोटाला मामले में तीन साल की कारावास की सजा सुनाई थी। इस सजा के बाद, मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी थी। इसी आदेश और सजा पर रोक लगाने की मांग को लेकर उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। सुनवाई के दौरान, वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम ने भारती की ओर से यह दलील दी कि यह मामला आपराधिक प्रकृति का न होकर सिविल विवाद से संबंधित है। उन्होंने बताया कि बैंक ने पहले इस विवाद को सिविल मामला मानते हुए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जहां दोनों पक्षों के बीच समझौता भी हुआ था। चिदंबरम ने यह भी कहा कि समझौते की राशि अभी तक प्राप्त नहीं हुई है और संबंधित एफडी बैंक में सुरक्षित है। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteदतिया सीट पर उपचुनाव की वजह Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteदतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की नौबत इसलिए आई है, क्योंकि कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दो वर्ष से अधिक की सजा मिलने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता स्वतः ही समाप्त हो गई थी। इसके उपरांत, मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने इस सीट को रिक्त घोषित कर दिया। यह कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के लिली थॉमस बनाम भारत संघ के ऐतिहासिक फैसले, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 और संविधान के अनुच्छेद 191(1)(e) के प्रावधानों के तहत की गई है। Add text below Add image below06Heading Paragraph Heading Subheading Quoteबैंक एफडी घोटाला: आरोपों का विवरण Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteयह कथित फर्जीवाड़ा 1998 में दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में एक फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि बैंक के रिकॉर्ड्स में हेरफेर करके एफडी की अवधि को 3 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष कर दिया गया था। इस कथित हेरफेर के आधार पर, वर्ष 1999 से 2011 के बीच एफडी पर ब्याज की राशि निकाली जाती रही। उस समय, राजेंद्र भारती बैंक के अध्यक्ष और संबंधित संस्था के ट्रस्टी के पद पर कार्यरत थे। बाद में इस मामले की गहन जांच की गई और आरोप पत्र दाखिल किया गया। Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteविधानसभा ने राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के तुरंत बाद सीट को रिक्त घोषित कर दिया था। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के अनुसार, किसी भी विधायक को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होने पर वह स्वतः ही अयोग्य हो जाता है। वर्ष 2013 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए लिली थॉमस फैसले के बाद, ऐसी स्थिति में विधानसभा सदस्यता तुरंत समाप्त हो जाती है। केवल अपील दायर करने मात्र से सदस्यता बहाल नहीं होती; इसके लिए उच्च अदालत द्वारा दोषसिद्धि या अयोग्यता पर रोक लगाना अनिवार्य होता है। Add text below Add image below