Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryभिंड के नदरोली गांव में बेसली नदी उफान पर होने के कारण शिक्षक और बच्चे ट्यूब व मटकी के सहारे नदी पार कर रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने रविवार शाम मौके का मुआयना किया और पढ़ाई तथा आवागमन सुचारू रखने के लिए चार वैकल्पिक प्रस्तावों पर विचार शुरू कर दियाCategoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/bhind-story-811d03ad
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअंचल के भिंड जिले में मानसून के दौरान बेसली नदी का जलस्तर बढ़ने से हालात किस कदर चुनौतीपूर्ण हो गए हैं, इसकी बानो नदरोली गांव से सामने आई है। संपर्क कट जाने के कारण यहां विद्यार्थियों और शिक्षकों को अपनी जान जोखिम में डालकर ट्यूब और मटकी के सहारे उफनती नदी पार करनी पड़ रही थी। इस गंभीर स्थिति को स्थानीय स्तर पर प्रमुखता से उठाए जाने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteमौके पर पहुंचे जिला शिक्षा अधिकारी Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteहालात की गंभीरता को भांपते हुए जिला शिक्षा अधिकारी सुधांशु द्विवेदी रविवार शाम सीधे बेसली नदी के तट पर पहुंच गए। उन्होंने वहां नदी के तेज बहाव का जायजा लिया। पानी का वेग इतना अधिक था कि अधिकारी खुद ट्यूब के सहारे नदी पार करके स्कूल तक नहीं पहुंच सके। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइसके बाद उन्होंने मौके पर ही शिक्षकों को बुलवाया और स्कूल में दर्ज बच्चों की संख्या तथा रोजमर्रा आ रही परेशानियों की पूरी जानकारी जुटाई। डीईओ ने कड़े निर्देश दिए कि जब तक नदी का बहाव तेज है, किसी भी स्थिति में बच्चों को ट्यूब या मटकी के सहारे नदी पार न कराया जाए और शिक्षकों को भी ऐसे बड़े जोखिमों से दूर रहने की हिदायत दी गई। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteनदरोली की आबादी और स्कूली बच्चों का संकट Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteनदरोली गांव की करीब एक हजार की आबादी हर साल बारिश के दिनों में सड़क संपर्क कटने की मार झेलती है। स्कूल जाने वाले नौनिहालों और पढ़ाने वाले गुरुजी के सामने हर रोज नदी पार करने की मजबूरी बनी रहती है। अब प्रशासनिक अमले के मुआयने के बाद ग्रामीणों को इस समस्या से स्थायी या अस्थायी राहत मिलने की उम्मीद जगी है। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteविद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए चार नए विकल्प Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteशिक्षा विभाग ने बच्चों की शिक्षा बाधित न हो और आवागमन सुरक्षित हो सके, इसके लिए चार मुख्य विकल्पों पर मंथन शुरू किया है। पहले विकल्प के तहत नदरोली के उन 20 विद्यार्थियों को जो बेसली नदी पार करके पराये के पुरा पढ़ने जाते हैं, उन्हें वहीं के प्राथमिक स्कूल में पढ़ाने का प्रस्ताव है। इसके लिए अतिरिक्त शिक्षक की व्यवस्था की जा सकती है ताकि बच्चों को रोज नदी न पार करनी पड़े। Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteदूसरे विकल्प के रूप में विभाग नदरोली के स्कूल में पदस्थ पांच शिक्षकों को एक-एक सप्ताह के लिए गांव में ही ठहरने की व्यवस्था पर विचार कर रहा है। वैकल्पिक तौर पर शिक्षकों की ऐसी ड्यूटी लगाई जा सकती है जिससे उनकी जान जोखिम में न पड़े। तीसरे विकल्प में नदी के दोनों सिरों पर मजबूत रस्सी बांधकर उसके सहारे नाव चलाने का सुझाव है, जिससे तेज बहाव में नाव भटके नहीं। वहीं चौथे और अंतिम प्रस्ताव के तौर पर नदी में स्टीमर या सुरक्षित नावें संचालित करने पर भी विचार किया जा रहा है। Add text below Add image below