Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryअशोकनगर जिले के पिपरई में प्रवचन देते हुए जैन मुनि दुर्लभ सागर जी महाराज ने कहा कि अत्यधिक उम्मीदें इंसान को गहरे घाव देती हैं। उन्होंने जीवन में उत्साह और प्रसन्नता का महत्व समझाते हुए कहा कि प्रसन्न मन बिना थके मीलों की यात्रा तय कर लेता है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/ashoknagar-story-ac4d8f2d
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअशोकनगर जिले के अंतर्गत आने वाले पिपरई नगर में इन दिनों जैन मुनि श्री दुर्लभ सागर जी महाराज का चातुर्मास चल रहा है। इस दौरान महाराजश्री अपने प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को जीवन की सच्चाई और आचरण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे रहे हैं। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteअपेक्षाओं का त्याग और जीवन की सहजता Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअपने प्रवचन में मुनि श्री ने रिश्तों और जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस प्रकार कटी हुई टहनियां व्यक्ति को शारीरिक कष्ट दे जाती हैं, उसी प्रकार दूसरों से हद से ज्यादा की गई उम्मीदें मन पर गहरे घाव छोड़ जाती हैं। इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह जीवन में अपनी अपेक्षाओं को सीमित रखे और हर परिस्थिति को सहज भाव से स्वीकार करे। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteप्रसन्न मन और उत्साह का महत्व Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमनुष्य के स्वभाव की तुलना करते हुए उन्होंने समझाया कि एक प्रसन्न मन बिना थके मीलों का सफर तय कर सकता है, जबकि उदास मन व्यक्ति को कदम-कदम पर थका देता है। जीवन में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ सुख-सुविधाएं और अनुकूल साधन ही काफी नहीं होते, बल्कि मन का उत्साह भी उतना ही जरूरी होता है। Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमहाराजश्री ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति के पास साधन और सुविधाएं भरपूर मात्रा में हों, लेकिन उसके मन में काम करने का उत्साह न हो, तो वह अपनी वास्तविक क्षमताओं का उपयोग नहीं कर पाता। निराश मन अच्छी परिस्थितियों में भी इंसान की गति को रोक देता है। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteआत्मविश्वास और स्वजनों का सहयोग Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteउन्होंने आगे कहा कि स्वस्थ शरीर जीवन की एक बड़ी पूंजी है, लेकिन केवल शारीरिक स्वास्थ्य से ही सफलता हासिल नहीं की जा सकती। इसके लिए मन में उमंग, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प होना अनिवार्य है तभी व्यक्ति अपने लक्ष्य तक पहुंच सकता है। Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteप्रवचन के अंत में मुनि श्री ने बताया कि परिवार और स्वजनों का साथ जीवन के सफर को आसान जरूर बनाता है, लेकिन असली सफलता के लिए खुद के भीतर से प्रेरणा आनी चाहिए। अपनों का सहयोग और मन का उत्साह मिलकर जीवन की राह को काफी सरल बना देते हैं। Add text below Add image below