Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryअशोकनगर में आयोजित एक धर्मसभा के दौरान मुनि श्री निरंजन सागर जी महाराज ने ध्यान के असली उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के समय में लोग ध्यान को केवल शारीरिक विश्राम तक सीमित कर रहे हैं, जबकि यह आत्मा के कल्याण का साधन है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/ashoknagar-story-42f481ef
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Heading Paragraph Heading Subheading Quoteअशोकनगर में आयोजित हुई विशेष धर्मसभा Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअशोकनगर शहर में संत मुनि श्री निरंजन सागर जी महाराज के सानिध्य में एक विशेष धर्मसभा का आयोजन किया गया, जिसमें उन्होंने अपने संबोधन के दौरान अध्यात्म और ध्यान से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला। Add text below Add image below03Heading Paragraph Heading Subheading Quoteइष्टोपदेश ग्रंथ का दिया गया संदर्भ Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअपने प्रवचन के दौरान मुनि श्री ने जैन आचार्यों के प्रसिद्ध ग्रंथ 'इष्टोपदेश' की कारिका का हवाला दिया। उन्होंने समझाया कि किसी भी ध्यान का मूल उद्देश्य ही उसके अंतिम परिणाम को पूरी तरह निर्धारित करता है। Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमहाराज श्री ने एक दृष्टांत का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया कि ध्यान साधना के जरिए जहां एक तरफ अमूल्य चिंतामणि रत्न प्राप्त हो सकता है, वहीं दूसरी तरफ मामूली कांच का टुकड़ा भी हाथ लग सकता है। कोई भी समझदार और विवेकशील व्यक्ति कभी भी चिंतामणि को छोड़कर कांच के टुकड़े को नहीं चुनेगा। Add text below Add image below06Heading Paragraph Heading Subheading Quoteशारीरिक विश्राम तक सीमित हुआ ध्यान Add text below Add image below07Quote Paragraph Heading Subheading Quoteवर्तमान समय में चारों ओर ध्यान केंद्रों की भरमार है, लेकिन लोग इसके वास्तविक और मूल लक्ष्य से भटक चुके हैं। Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमुनि श्री ने आज की जीवनशैली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान दौर में ध्यान को महज 'फिजिकल रिलैक्सेशन' यानी शारीरिक विश्राम का जरिया मान लिया गया है। जबकि जैन आचार्यों ने इसे सीधे तौर पर जीव की आत्मा के कल्याण का मार्ग बताया है। Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteउन्होंने सभा को बताया कि ध्यान के परिणाम मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं। पहला परिणाम मनुष्य को इस अंतहीन संसार चक्र में उलझाए रखता है, जबकि दूसरा परिणाम उसे सीधे मोक्ष की प्राप्ति की ओर अग्रसर करता है। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसंत ने अंत में यह संदेश दिया कि यह पूरी तरह से हमारे अपने पुरुषार्थ पर निर्भर करता है कि हम किसे चुनते हैं। जैसा फल हम पाना चाहते हैं, वैसी ही सच्ची दिशा में हमें अपना प्रयास करना होगा। Add text below Add image below