Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryजिले के पचास से ज्यादा सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में सिर्फ एक शिक्षक ही बच्चों को पढ़ाने के साथ सभी विभागीय और प्रशासनिक काम संभाल रहा है। ऑनलाइन पोर्टल पर पद भरे दिखने के कारण जमीनी हकीकत और आंकड़ों में बड़ा अंतर बना हुआ है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/ashoknagar-50-9808a4ed
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Heading Paragraph Heading Subheading Quoteअशोकनगर जिले के पचास से ज्यादा स्कूलों का हाल बेहाल Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअशोकनगर क्षेत्र के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के तमाम दावों की पोल ग्रामीण इलाकों के स्कूल खोल रहे हैं। जिले में पचास से अधिक ऐसे प्राथमिक विद्यालय संचालित हो रहे हैं, जहां पूरी शैक्षणिक व्यवस्था महज एक शिक्षक के भरोसे टिकी हुई है। इन विद्यालयों में नामांकित बच्चों को पहली से लेकर पांचवीं तक की कक्षाओं में एक साथ बैठाकर पढ़ाया जाता है। Add text below Add image below03Heading Paragraph Heading Subheading Quoteबड़ागांव स्कूल की जमीनी हकीकत और प्रशासनिक जिम्मेदारियां Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteशासकीय प्राथमिक स्कूल बड़ागांव इस व्यवस्था की बानगी पेश करता है, जहां शिक्षक सुनील शर्मा अकेले ही 23 विद्यार्थियों को संभाल रहे हैं। पढ़ाने के अलावा उन्हें मध्यान्ह भोजन की देखरेख, यू-डाइस, समग्र आईडी और पोर्टल से जुड़े तमाम ऑनलाइन कार्य अकेले ही पूरे करने पड़ते हैं। प्रशासनिक कामकाज में समय बीत जाने के कारण बच्चों को मिलने वाला शिक्षण समय काफी कम हो जाता है। Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस स्कूल में पहले दो शिक्षक पदस्थ थे, किंतु जून 2025 में शिक्षिका कौशल्या करेले के निधन के बाद एक पद रिक्त हो गया था। हालांकि, ताज्जुब की बात यह है कि एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर यह पद अभी भी भरा हुआ ही प्रदर्शित हो रहा है, जिससे वास्तविक स्थिति और ऑनलाइन आंकड़ों में बड़ा फर्क है। Add text below Add image below06Heading Paragraph Heading Subheading Quoteबच्चों को घर बुलाने से लेकर पोर्टल की गड़बड़ियों तक की चुनौती Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteएकल शिक्षक होने के कारण यहां बच्चों की नियमित उपस्थिति बनाए रखना भी बड़ी चुनौती बन गया है। उपस्थिति कम होने पर शिक्षक को खुद गांव में जाकर बच्चों को घर से स्कूल लाना पड़ता है। इसके अलावा, पोर्टल पर रिक्त पद न दिखने के कारण न तो नियमित शिक्षक मिल पा रहे हैं और न ही अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था हो पा रही है। Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteरावसर, बासापुर और बाजिदपुर समेत जिले के अन्य ब्लॉकों में भी कमोबेश यही हालात हैं, अकेले अशोकनगर ब्लॉक में ही पच्चीस ऐसे विद्यालय हैं। शिक्षक के अवकाश पर जाने या किसी शासकीय प्रशिक्षण व बैठक में बाहर रहने पर इन विद्यालयों की पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है। Add text below Add image below